(बदरा कब तक भागेगा, आज ठहर मोरे देस
नैनन में
पानी लिए, कोई निरखे मेघ ) !! (starting from alaap)
प्यासी थी कल तक धरती, था गुमसुम आसमाँ
बंजर थे ख़्वाब सारे, फिरते थे यहाँ-वहाँ ; -4
थी ख़ुशियों से आँखमिचोली, ख़ुशियाँ हाथ ना आईं
साये सी थीं साथ हमारे, पर ढ़ूँढा कहाँ-कहाँ ;
-3
(रंग कहाँ पानी का कोई, फिर भी रंग हैं सारे
जाने कैसे बन जाते हैं, रिश्ते मीठे-खारे)
–2 (connecting repeat)
(अँसुअन पानी, बिरहन पानी, बैरन पानी रे...
तनमन पानी, दरपन पानी, जोगन पानी रे...) !! -1 (second
alaap :with connecting last rythm)
कोशिश जीती, अड़चन हारी, किस्मत मेहरबाँ
लहराते पानी पर हमनें लिख दी है दास्ताँ ; +4
अन्धियारों की चट्टानों से राह निकलती तो है
मिट्टी गाती झूम रही, अब हर मुश्किल आसाँ ; +3
(रंग कहाँ पानी का कोई, फिर भी रंग हैं सारे
जाने कैसे
बन जाते हैं, रिश्ते मीठे-खारे) +2 (connecting repeat)
(बरसन पानी, दरसन पानी, सब जन पानी रे...
माँगन पानी, बाँटन पानी, सब धन पानी रे...) +1 (Last
alaap with same repeat rythm)
- This SHORT SONG written by me for DOORDARSHAN NATIONAL on Water.

