Wednesday, 19 February 2014

दूरदर्शन के लिए लिखा गया गीत...




(बदरा कब तक भागेगा, आज ठहर मोरे देस
नैनन  में  पानी लिए,  कोई निरखे मेघ ) !! (starting from alaap)

प्यासी थी कल तक धरती, था गुमसुम आसमाँ
बंजर थे ख़्वाब सारे,  फिरते थे  यहाँ-वहाँ ; -4
थी ख़ुशियों से आँखमिचोली, ख़ुशियाँ हाथ ना आईं
साये सी थीं साथ हमारे, पर ढ़ूँढा कहाँ-कहाँ ; -3
(रंग कहाँ पानी का कोई, फिर भी रंग हैं सारे
जाने  कैसे बन  जाते हैं,  रिश्ते  मीठे-खारे) –2 (connecting repeat)

(अँसुअन पानी, बिरहन पानी, बैरन पानी रे...
तनमन पानी, दरपन पानी, जोगन पानी रे...) !! -1 (second alaap :with connecting last rythm)

कोशिश जीती, अड़चन हारी, किस्मत मेहरबाँ
लहराते पानी पर हमनें लिख दी है दास्ताँ ; +4
अन्धियारों की चट्टानों से राह निकलती तो है
मिट्टी गाती झूम रही, अब हर मुश्किल आसाँ ; +3
(रंग कहाँ पानी का कोई, फिर भी रंग हैं सारे
जाने  कैसे बन  जाते हैं, रिश्ते  मीठे-खारे) +2 (connecting repeat)

(बरसन पानी, दरसन पानी, सब जन पानी रे...
माँगन पानी, बाँटन पानी, सब धन पानी रे...) +1 (Last alaap with same repeat rythm)

- This SHORT SONG written by me for DOORDARSHAN NATIONAL on Water.


मिस्टिकल सेंस




कभी-कभी अकेलापन भ्रम पैदा करता है l अकेले होने का भ्रम l दुनियावी चीज़ों से अलग रह पाने का भ्रम l बिना किसी संघर्ष के भूख,इज़्जत और सुरक्षा के मानी पूरे होते रहने का भ्रम l ऐसा महसूस होने लगता है कि कुछ बलिदान करके आप सत्य कि ओर बढ़ रहे हैं l वही आत्मा का सत्य, जिसे पाने के लिये हमने हाड़ कँपा देने वाली सर्द रात में एक झीनी सी धोती से अपने नवजात को ढँके सड़क किनारे पड़ी माँ के बिल्कुल नंगे सत्य से आँखे घुमा लीं l 
कितने ऐसे सत्य कि तलाश में आगे गये,कितने और जायेंगे पता नहीं l 
लेकिन इतना तय है कि नींद बेचकर ख़्वाब ख़रीदने का सिलसिला चलता रहेगा l ऐसा एकान्त निश्चित ही रचनात्मक होता है लेकिन क्रियात्मकता के मूल्य पर कतई स्वीकार नहीं है l
जिम कार्बेट अपनी पुस्तक में एक जगह शिकारी के “मिस्टीकल सेन्स” के बारे में लिखते हैं कि कैसे उस शांत लगने वाले जंगल में छिपी हज़ारों आँखों कि टोह शिकारी को मिल जाती है l
ठीक वैसे ही बार-बार यह भ्रम होता है कि, जैसे यह चुप्पी,यह सन्नाटा,यह शांति एक धोखा है l एक छलावा l सुनसान जंगल का एक ऐसा मायाजाल, जिसके पीछे अनगिनत जीव और प्राणी हमारी प्रत्येक मुद्रा, भाव-भंगिमा और हरकत को देख रहे हैं l जबकि हमें चारों ओर स्तब्ध सा सन्नाटा महसूस होता है l एक पूरी कि पूरी आगत पीढ़ी हमारी ओर देख रही है और हम प्रेम और सुंदरता के गीत गा रहे हैं ... !!!