Tuesday, 23 April 2013

अपनी-अपनी सान, अपनी-अपनी धार

आहत सभी हैं, दिल सभी के दुखे हैं ! पर किससे आहत हैं ?... उस दिन से आप भी अपनी बेटी,बहन,पत्नी को उस लड़की की जगह रखकर सोच रहे हैं और सहमे हैं ना ?... सिर्फ़ एक पल के लिए सोचिए,"अगर उन बलात्कारियों में से कोई आपका भाई,बेटा,दोस्त होता तो?"... क्यूँ नहीं हो सकता ? अगर पूरा विश्वास हो कि कोई बलात्कारी आपके घर में नहीं, तभी उस लड़की के लिए एक भी लफ़्ज़ बोलिएगा और "बलात्कार की परिभाषा फिर से देख,पढ़, समझ लीजिए" !! और अगर रत्ती भर भी शक हो अपने संस्कारों पर तो ""असल मुसीबत आप ही हैं..."" !!! बुरा लग रहा है ना ? तो समझिए अभी आप भी "मनसा, वाचा, कर्मणा सड़क के उस तरफ ही हैं" ...

2 comments:

  1. बहुत ही अच्छा प्रयास है... कृपया इसे सतत् जारी रखें ... इस उम्दा ब्लॉग के लिये मेरी ओर से बधाई और शुभकामनाएं।

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    1. सर जो कुछ सीखा है, आपसे ही सीखा... आपका आशिर्वाद,दिशा-निर्देशन और निश्छल प्रेम ही हम जैसे कई छात्रों के संघर्ष की ऊर्जा है।

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