आज रचेगा बूँद एक
वो !
उसका सागर भी प्यासा है,
कल्पित को देगा शब्द आज
जो अब तक धुँआ धुँआ सा है ;
कल्पना आज होगी सजीव जो
जीवन के तल पर
ठहरे,
समवेत सत्य का ज्ञान जहाँ
भाषा, रस, छंद से हो जो परे;
साक्षी हो जो मौन नाद की
बूँद रचेगा आज वही,
अगणित असत्य कह, पाया जो
सत्य कहेगा आज
वही ;
बूँद साध्य है, बूँद है
साधन
बूँद स्वयं
प्रतियोगी है,
सिंहासन का भोग बूँद है
बूँद पथिक, पथ, जोगी है ;
इसी बूँद हेतु सब छूटा
इसी बूँद हेतु वो टूटा ;
इसी बूँद पर लक्ष्यित था वो
इसी बूँद में संचित था वो !
संकल्प बूँद है, प्राण बूँद
सत्य बूँद है, साक्ष्य बूँद,
सर्जक के नयनों से
टपकी
बस यही बूँद है, वही बूँद
!!!!!!
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