इतिहास के महानतम क्षणों में एक व्यक्ति
का अँधेरा, दूसरे के आलोक की कसौटी बना l यह वास्तव में दोनों की आत्माओं का संघर्ष था l संघर्ष, स्वयं को पहचानने का l संघर्ष, सत्य से साक्षात्कार का l भगवान बुद्ध हो सकने के लिए राजकुमार सिद्धार्थ का होना उतना ही
आवश्यक था, जितना महात्मा गाँधी होने के लिए
मोहनदास करमचंद गाँधी का होना l “जरा और मृत्यु” राजकुमार सिद्धार्थ ने देखी और “इंसान-इंसान में भेद का अपमान” मोहनदास करमचंद गाँधी ने झेला l जिस क्षण लोगों के भीतर व्याप्त दुख के अंधकार को इन दोनों ने
अपने सुख के आलोक से मापा, उसी क्षण उपजी आत्मछलना की भावना ने
मनुष्यत्व को एक नयी करवट, एक नया आयाम दिया l हमें भगवान बुद्ध और महात्मा गाँधी मिले
l

bhai bahut shandar likhte ho aap...mai mobile par aapka blog visit karta rahta hu...bhaiya kya aap meri ek baat maanoge..
ReplyDeleteaap please thoda sa normal hindi ka use karo...kuch cheez meri bhi samajh me nahi aati...halanki meri hindi achhi hai bhaiya..
mai bhi kuch likhta hu...aise hi..kabhi aapko dikhana chahta hu..is it possible bhaiya?