ताई तुम्हारे लिए ---
बगल के नुक्कड़ पर "रहमत बेगम" रहती हैं, मैं उन्हें ताई कहता हूँ ....बेवा हैं और चाय की दुकान चलाती हैं ....उम्र ने बहुत तजुर्बा दिया है और इस बात का फक्र भी है उन्हें ....सारे सिद्धांत, आदर्श, दर्शन, विज्ञान उनकी चौखट पे आकर चाय पीते हैं ...और अपनी बेचारगी को जिंदगी के चूल्हे पर उबाल उबाल कर ताई मुस्कुराते हुए जी रही हैं ....ताई ने परसों कहा की कुछ मुझपर भी लिख ....देखूँ तेरी कलम मेरा दर्द किस हद तक महसूस करती है .... मैंने कोशिश कर ली और उन्हें कल सुनाऊंगा ....आज आप अगर इस दर्द को महसूस कर सके तो ....ताई के लिए दुआ मांगिएगा ....बेटी के निकाह के लिए बैंकों के चक्कर काट रही है ताई ...

बगल के नुक्कड़ पर "रहमत बेगम" रहती हैं, मैं उन्हें ताई कहता हूँ ....बेवा हैं और चाय की दुकान चलाती हैं ....उम्र ने बहुत तजुर्बा दिया है और इस बात का फक्र भी है उन्हें ....सारे सिद्धांत, आदर्श, दर्शन, विज्ञान उनकी चौखट पे आकर चाय पीते हैं ...और अपनी बेचारगी को जिंदगी के चूल्हे पर उबाल उबाल कर ताई मुस्कुराते हुए जी रही हैं ....ताई ने परसों कहा की कुछ मुझपर भी लिख ....देखूँ तेरी कलम मेरा दर्द किस हद तक महसूस करती है .... मैंने कोशिश कर ली और उन्हें कल सुनाऊंगा ....आज आप अगर इस दर्द को महसूस कर सके तो ....ताई के लिए दुआ मांगिएगा ....बेटी के निकाह के लिए बैंकों के चक्कर काट रही है ताई ...

No comments:
Post a Comment