हिंदी दिवस पर विशेष बोलबचन........!!!
एक बच्चा है ! नाम है हिन्दुस्तानी , उसके पिता ने दो शादियाँ कीं ; जाहिर है नयी माँ पुरानी वाली से खूबसूरत, कमसिन, पैसे वाली और उसके बाप को मुट्ठी में रखने वाली थी !! पुरानी माँ सीधी-साधी कोने में पड़ी,बिना किसी छल प्रपंच के ! पिता को बाहर जाना होता तो नयी माँ, बच्चे को पैसे चाहिए तो नयी माँ, कोई फैसला करना होता तो नयी माँ, घर में मेहमान आ गए तो नयी माँ, पिता से कोई बात मनवानी हो तो नयी माँ !!!!!
लेकिन जब बच्चा टीचर की मार खाकर लौटता तो पीठ पर हल्दी लगाने के लिए वही पुरानी माँ, जब-जब पिता की तबियत खराब होती तो दिन-रात सेवा के लिए वही पुरानी माँ, जब किसी बात पे रोते हुए बच्चा सोता तो माथे पे हाथ फिराकर चादर उढाती वही पुरानी माँ, अपने हिस्से की मिठाई बेटे के हाथ पर धर के उसकी मुस्कराहट देखती वही पुरानी माँ, ..............उसकी अपनी माँ !! उसे पैदा करने वाली माँ ...... उसे अपनी सौत से कई जलन नहीं ! उसे तो ख़ुशी होती है अपने पति और बेटे की ख़ुशी देखकर .............मगर इतना ही चाहती है वो कि जब पति थका हारा वापस आये तो कभी उसके कोने वाले कमरे कि खिड़की से उसे सोता हुआ देख जाए !! और उसका बेटा जब परीक्षा में अव्वल आये तो उसके भी पाँव छूकर आशीर्वाद ले .........!!!
इतना हक तो उस बच्चे पर इस बुढ़िया का बनता ही है न ??
ये बच्चा है वो शख्स जो इसे इस वक़्त पढ़ रहा है ................और उसकी नयी माँ है - "अंग्रेजी"..................और पुरानी माँ है - "जिसका आज दिन है हिंदी".....!!!
बस इतनी सी ही कहानी है ......जिसे हम तमाम लफ्जों में अलग-अलग मायने दे रहे हैं !!
एक बच्चा है ! नाम है हिन्दुस्तानी , उसके पिता ने दो शादियाँ कीं ; जाहिर है नयी माँ पुरानी वाली से खूबसूरत, कमसिन, पैसे वाली और उसके बाप को मुट्ठी में रखने वाली थी !! पुरानी माँ सीधी-साधी कोने में पड़ी,बिना किसी छल प्रपंच के ! पिता को बाहर जाना होता तो नयी माँ, बच्चे को पैसे चाहिए तो नयी माँ, कोई फैसला करना होता तो नयी माँ, घर में मेहमान आ गए तो नयी माँ, पिता से कोई बात मनवानी हो तो नयी माँ !!!!!
लेकिन जब बच्चा टीचर की मार खाकर लौटता तो पीठ पर हल्दी लगाने के लिए वही पुरानी माँ, जब-जब पिता की तबियत खराब होती तो दिन-रात सेवा के लिए वही पुरानी माँ, जब किसी बात पे रोते हुए बच्चा सोता तो माथे पे हाथ फिराकर चादर उढाती वही पुरानी माँ, अपने हिस्से की मिठाई बेटे के हाथ पर धर के उसकी मुस्कराहट देखती वही पुरानी माँ, ..............उसकी अपनी माँ !! उसे पैदा करने वाली माँ ...... उसे अपनी सौत से कई जलन नहीं ! उसे तो ख़ुशी होती है अपने पति और बेटे की ख़ुशी देखकर .............मगर इतना ही चाहती है वो कि जब पति थका हारा वापस आये तो कभी उसके कोने वाले कमरे कि खिड़की से उसे सोता हुआ देख जाए !! और उसका बेटा जब परीक्षा में अव्वल आये तो उसके भी पाँव छूकर आशीर्वाद ले .........!!!
इतना हक तो उस बच्चे पर इस बुढ़िया का बनता ही है न ??
ये बच्चा है वो शख्स जो इसे इस वक़्त पढ़ रहा है ................और उसकी नयी माँ है - "अंग्रेजी"..................और
बस इतनी सी ही कहानी है ......जिसे हम तमाम लफ्जों में अलग-अलग मायने दे रहे हैं !!
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