Tuesday, 23 April 2013

मेरा विश्वास है कि चूहे पर बिल्ली, बिल्ली पर कुत्ते, कुत्ते पर शिकारी कुत्ते और शिकारी कुत्ते पर बाघ को उकसाकर अपना मतलब साधने वाले तमाशबीनो की मुट्ठी मे तब तक ख़ालीपन रहेगा, जब तक हिंद के किसी भी कोने में इतिहास को पहनने ओढ़ने का जज़्बा एक भी शख्स में ज़िंदा रहेगा l एक शख्स ने अपनी तमाम जिंदगी बीहडों में डाकू बनकर और बाकी दर्जनों हत्याओं के लिए मिली ताउम्रक़ैद में निकाल दी l अंगुलीमाल का साक्षात रूप बनकर l मगर फिर इस शख्स को एक किताब मिली "सत्य के प्रयोग", और बस फिर क्या था ... बचा हुआ जीवन खादी, गाँधी जी और भारतवर्ष को समर्पित !! आप हैं भारत के प्रख्यात गाँधीवादी "श्री सुरेश सर्वोदयी जी" ... सड़क चलते हुए भी आपकी फेंकी हुई डिस्पोजल खुद उठाकर चुपचाप आगे बढ़ जाते हैं l अगर कभी किसी युवा के हृदय से लेशमात्र भी उत्साह कम हो तो एक बार सुरेश जी को याद करिएगा. शायद गाँधी के शरीर से अंतिम समय निकलता रक्त अपनी दुहाई माँगता महसूस हो l पुरस्कारों,भाषणों,दान,धर्म और वाद से कहीं दूर भारत के कोने-कोने में एक विश्वास की अलख जगाते भारतीपुत्र को मेरे रोम-रोम से नमन... एक विश्वास "भारत अभी जीवित है" ... !!!

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