रौशन होने की कोशिश में है इक चिराग ,
इंसानियत बचाए रखने में मददगार होगा ;
बेशक ये खो जाए ,सूरज के उजालों में ,
मगर अमावास की रात का यही पहरेदार होगा !!!
आज तपती धुप में एक सिक्ख परिवार को जब" निष्काम कर्म " करते देखा तो बरबस ही ख़याल आया की इन्होने गीता पढ़ी हो या नहीं ...लेकिन हर तरफ नाउम्मीदी के स्याह साए में एक रूहानी मुस्कान की छोटी सी ही सही वजह तो ये हैं ही ...बूढ़ी सिक्ख माँ जिस तरह बिना जात और मजहब के सवाल में उलझे हर प्यासे को शरबत पिलाती थी , देखकर आँखे भर आई ...जितनी देर हो सका सिक्ख परिवार का हाथ बंटाया , और फिर चलते चलते उस माँ के हाथ से" परसाद " पाया ...मंदिर का चरणामृत जितनी श्रद्धा ईश्वर में आज तक नहीं जगा पाया ...उतनी भारत के इस तथाकथित सभ्य समाज के बीचोबीच होने वाले वास्तविक मानवीय प्रयास के इस यग्य के चरणामृत ने जगा दी ... आज के दिन के लिए आत्मा तृप्त है ...

इंसानियत बचाए रखने में मददगार होगा ;
बेशक ये खो जाए ,सूरज के उजालों में ,
मगर अमावास की रात का यही पहरेदार होगा !!!
आज तपती धुप में एक सिक्ख परिवार को जब" निष्काम कर्म " करते देखा तो बरबस ही ख़याल आया की इन्होने गीता पढ़ी हो या नहीं ...लेकिन हर तरफ नाउम्मीदी के स्याह साए में एक रूहानी मुस्कान की छोटी सी ही सही वजह तो ये हैं ही ...बूढ़ी सिक्ख माँ जिस तरह बिना जात और मजहब के सवाल में उलझे हर प्यासे को शरबत पिलाती थी , देखकर आँखे भर आई ...जितनी देर हो सका सिक्ख परिवार का हाथ बंटाया , और फिर चलते चलते उस माँ के हाथ से" परसाद " पाया ...मंदिर का चरणामृत जितनी श्रद्धा ईश्वर में आज तक नहीं जगा पाया ...उतनी भारत के इस तथाकथित सभ्य समाज के बीचोबीच होने वाले वास्तविक मानवीय प्रयास के इस यग्य के चरणामृत ने जगा दी ... आज के दिन के लिए आत्मा तृप्त है ...

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