Tuesday, 23 April 2013

एक ही पत्थर किसी गलत हाथ में पड़ जाए तो किसी का जख्म बन जाता है ....किसी माइकल एंजेलो के हाथ में आ जाए तो हुनर का शाहकार बन जाता है ....किसी का चिंतन उसे छू ले तो शिलालेख बन जाता है और किसी गौतम का स्पर्श पा ले तो वज्रासन बन जाता है !!! वैसे ही है मजहब ...जितने जेहन उतने मजहब ....हिन्दू-मुस्लिम कट्टरता के मिथ को महज एक मुस्कान से तोड़ता हुआ ये शख्स आपको उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर के आस-पास दिखाई देगा !! पिछले दस साल से शिव ज्योतिर्लिंग की तस्वीरें घूम-घूम कर बेचते हैं ...वो भी बेहिचक-बेलाग (इनके हाथ में गौर करें ) !!! दुनिया का इतिहास हर मजहब के नाम पर खून से भीगा हुआ है .....वजह सिर्फ इतनी है की जिन्हें लोगों को मजहब की तालीम देनी चाहिए वो दर दर की ठोकरें खा रहे हैं ........और मजहब को जनेऊ, त्रिपुंड और टोपी ,दाढ़ी की तरह बाहर से ओढने वाले खाप फैसले और फतवे जारी कर रहे हैं ...

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